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मूसाफिर हु यारो



मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम , न घर है ना ठिकाना,
जहाँ रात हुयी वही ठिकाना, जो बोले मीठे बोल वही है याराना,
मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम

7 comments:

Mishra Pankaj said...

सुन्दर फोटो क्या यह फोटो इलाहाबाद स्टेसन की है ?

Nirmla Kapila said...

वाह सुन्दर तस्वीर है। यहां सभी मुसाफिर हैं घबराओ मत बस चलते रहो आशीर्वाद

sada said...

बहुत बढि़या ।

अबयज़ ख़ान said...

इक हमसफ़र की तलाश में मैं चलता चला गया।
सफ़र मेरा लेकिन अब तक नहीं हुआ मुकम्मल।।

Babli said...

वाह सुंदर तस्वीर के साथ आपने बहुत ही बढ़िया लिखा है ! मुझे वो मशहूर गाना याद आ गया "मुसाफिर हूँ यारों, न घर है न ठिकाना, मुझे चलते जाना है..."!

Aarjav said...

क्या बात है ....कुन कुनी धूप में गरम गरम चाय .....! अच्छी फोटो !

संजय भास्कर said...

PHOTO KIS JAGAH KA HAI..
LAJWAAB PHOTO HAI STATION KA

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