ऐसी ही एक तस्वीर थी जिसके नीचे ये पंक्ितयां थीं - मेरी आखिरी तस्वीर कौन सी होगी, क्या मेरी ही ली हुई.... या किन्ही लोंगों द्वारा। रात में रोशनी की जगमगाहट देखते ही बनती है, पर सवेरों को लोगों ने गर्क कर दिया है, नहीं धीरज जी।
आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।
8 comments:
ऐसी ही एक तस्वीर थी जिसके नीचे ये पंक्ितयां थीं - मेरी आखिरी तस्वीर कौन सी होगी, क्या मेरी ही ली हुई.... या किन्ही लोंगों द्वारा। रात में रोशनी की जगमगाहट देखते ही बनती है, पर सवेरों को लोगों ने गर्क कर दिया है, नहीं धीरज जी।
अद्भुत फोटो...बधाई
नीरज
nice
:)
B'ful!!!!!
सुन्दर चित्र।
नमस्ते,
आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।
अद्भुत फोटो...बधाई
बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...
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