
जल रहा है शहर
आज अपनो से
लोगो ने जला डाले
अपने अपने आँगन
जहाँ कभी आँगन मे गुजती थी
चिडियों का कलरव
आज गूंजती है
केवल सुनी हवाएं
कभी आँगन मे पड़ते थे झूले
झूलो पर चहचहाती हँसी
आज गूंजती है
सुनी आवाजे
जल रहा है शहर
आज अपनो से
लोगो ने जला डाले
अपने अपने आँगन