Tuesday, December 1, 2009

बढते कदम



चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर
कल उलझे थे कदम अपनी परेशानियो मे
आज फिर चल पडे कदम अपनी मन्जिल की ओर
असमन्जस मे थे अपने कदम बढने से पहले
फिर सोचा चलो बढाये कदम मन्जिल की ओर

3 comments:

  1. कौन-कौन हैं इसमें । चित्र बेहद नैसर्गिक है ।

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  2. बहुत सुंदर और सही लिखा है आपने! हमें कदम बढ़ाते रहना चाहिए ! चाहे कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यूँ न करना पड़े पर कभी हार नही मानना चाहिए!

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  3. chitr ko shbd deti kavita!
    bahut khoob!

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