Saturday, August 29, 2009

पहचान



थोडा अपना सा कुछ बेगाना सा
कुछ पहचाना सा कुछ अन्जाना सा
थोडा भोला सा कुछ दिवाना सा
कुछ ऐसा है हम सफर मेरा
इक अजनबी , जाना - पहचाना सा ।

Friday, August 28, 2009

रिश्ता



आज मुलाकात हुयी लहरों से
उसने हमसे पुछा
हमारी पहचान क्या है आप से
हमारा रिश्ता क्या है आप से
तो मन मे उठी हलचल
सच मे हमारा क्या रिश्ता है
हम तो रोज आते है किनारों पर
हमने तो ना सोचा था
क्या रिश्ता है आप से
आज मन की डोर हो गई कमजोर
हम रिश्तो का नाम न दे पा रहे है
हम तो आये थे किनारे मौज मानाने
उन्होंने ने तो रिश्तो की डोर बना ली
अब तो रिश्तो की डोर थामने से डर लगता है
कही ये रिश्ते मैले न हो जाय
उन्होंने ने तो रिश्ता बनाया था दिल का
और हम कहते है की रिश्ता क्या है
आज फिर लहरों ने पुछा
क्या रिश्ता है हमारा

Thursday, August 27, 2009

शाम का उजाला



सुबह से हुयी
आज शाम
खामोश
किनारों दे दी आवाज
साहिलों ने भी आज दिल्लगी की हमसे
हमने भी सोचा
चलो आज हम भी दिल्लगी करे साहिलों से
साहिलों ने भी हमें लहरों से मिलाया
लहरों की भी कहानी अजीब है
उसका अपनापन भी है
बेगानापन भी है
बेवजह लोग उसे कतराते है
आज फैला डाली अपनी झोली
उसने डाले बंद सीप के मोती
खामोश
किनारों दे दी आवाज आज ............