IMAGE PHOTOGRAPHY
A Photo-Blog of Dhiraj shah
Friday, October 30, 2009
अंजान
अंजान है रास्ता , अंजना है सफर , अनजाने लोग , अंजान है हमसफर ,फिर भी निकल पड़ा हु |
आगे
पहचाना रास्ता मिला , मंजिल मिला , पहचाने लोग मिले , हमसफर मिला ,
पर
मेरी पहचान न मिली ...........
Wednesday, October 28, 2009
मूसाफिर हु यारो
मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम , न घर है ना ठिकाना,
जहाँ रात हुयी वही ठिकाना, जो बोले मीठे बोल वही है याराना,
मुसाफिर हु यारो, बस चलना है काम
Tuesday, October 27, 2009
अकेला
आज अकेला हुँ , कल के साथ के लिए ,आज मै एक कदम चला, दो कदम साथ के लिये,
मंजिल दुर है , साथ तो चलो दो कदम।
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