Friday, July 31, 2009

बचपन



बालपन गुजारा माँ की गोद में
अपनी थी मौज बचपन मे ,
नादानीयो का पिटारा था बचपन
हर तरफ थी मौज ही मौज
न किसी से गीला था
न किसी से शिकवा - शिकायत
अपनी थी मौज बचपन मे ,
दिन बीतता था दोस्तो के संग
माँ की डाट भी उड जाती थी मौज मे
यारो के संग दोपहर मे बगीचे मे खेलना
अपनी थी मौज बचपन मे ।

Thursday, July 30, 2009

पहली किरण


भोर की पहली किरण
लायी नयी किरणो का सबेरा
नयी किरण लायी जिन्दगी मे उजाला
उजाले ने फैलाया मन मे उल्लास
उल्लास ने जगाया हौसला
हौसले ने बनायी तकदीर
तकदीर ने सवारा हमे।

Wednesday, July 29, 2009

माँ की ममता


माँ की ममता देखी धुप - छाँव मे

Sunday, July 26, 2009

नाग पंचमी



श्रावणमासके शुक्लपक्षकी पंचमी तिथिको नागपंचमी का त्योहार नागोंको समर्पित है। इस त्योहारपर व्रतपूर्वक नागोंका अर्चन-पूजन होता है। वेद और पुराणोंमें नागोंका उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रूसे माना गया है। नागोंका मूलस्थान पाताललोक प्रसिद्ध है।

ब्रह्माजीने पंचमी तिथिको नागोंको पाण्डववंशके राजा जनमेजय द्वारा किये जानेवाले नागयज्ञसे यायावरवंशमें उत्त्पन्न तपस्वी जरत्कारु के पुत्र आस्तीक द्वारा रक्षाका वरदान दिया था। तथा इसी तिथिपर आस्तीकमुनिने नागोंका परिरक्षण किया था । अत: नागपंचमीका यह पर्व ऎतिहासिक तथा सांस्कृतिक दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण है ।

श्रावनमासके शुक्लपक्षकी पंचमीको नागपूजाका विधान है। व्रतके साथ एक बार भोजन करने का नियम है। पूजामें पृथ्वीपर नागोंका चित्राड्कन किया जाता है। स्वर्ण, रजत, काष्ठ या मृत्तिकासे नाग बनाकर पुष्प, गुन्ध, धूप-दीप एवं विविध नैवेधोंसे नागोंका पूजन होता है।

निज गृहके द्वारमें दोनों ओर गोबरके सर्प बनाकर उनका दधि, दूर्वा, कुशा, गन्ध, अक्षत, पुष्प, मोदक और मालपुआ आदिसे पूजा करने और ब्राह्मणोंको भोजन कराकर एकभुक्त व्रत करनेसे घरमें सर्पोंका भय नहीं होता है।

आभार - www.riiti.com

Saturday, July 25, 2009

सात रंग



सात रंग
सच मे ये सपनो के सात रंग है
जो हमारे जीवन के हर संग है
जो रोज जीते है
हर पल जीते है
भिन्न भिन्न रंग।

जीवन का उतार - चढाव
रंगो के संग आता जाता है
कुछ मीठें है
तो
कुछ खट्टे भी है ।

ये है
सात रंग

Friday, July 24, 2009

महंगा हुआ खाना


आज खाने की थाली हुयी महंगी
क्या गरीब क्या अमीर
सब है परेशान
क्या खाये क्या ना खाये
भोजन हुआ महंगा
थाली मे न दाल है
न सब्जी
थाली हुयी उदास
क्या करे गरीब
क्या करे अमीर
चारो ओर फैली है
आज महंगायी
जो रोके न रुके किसी से
आज महंगा हुआ खाना

Thursday, July 23, 2009

बुद्ध



बुद्धम शरणम गच्छामि

धम्मम शरणम गच्छामि

संघम शरणम गच्छामि

मैं बुद्ध की शरण में जाने.

मैं धर्म की शरण में जाने।

मै सघ की शरण मे जाने


Wednesday, July 22, 2009

सुर्य और चन्द्र का मिलन




आज सुबह से ही मै सदी के बेहतरीन नजारे को देखने के लिये अपने कैमरे के साथ अपने छत पर मौजुद था, कुछ अद्दभुत द्रुश्य सहेज सकु, फिर मौका मिले या ना मिले,लोग कह रहे थे कि आज सुर्य ग्रहण है पर यह ग्रहण नही यह मिलन था सुर्य और चन्द्र का।

Tuesday, July 21, 2009

Monday, July 20, 2009

Sunday, July 19, 2009

Saturday, July 18, 2009

आज बाद्लों ने मचाया शोर

आज बादलो ने मचाया शोर

मन मयुरी नाच उठा

जैसे घुमडे बदरा

वैसे मन डोले आज

तन भींगा मन भींगा

वैसे ही भींगी धरती

देख सावन की यह घटा

आज बादलो ने मचाया शोर

Wednesday, July 15, 2009

बेरोजगारी

berojgari

ये चित्र है हमारे देश की बेरोजगारी का, जहाँ मजदूर ही नही पडे-लिखे बेरोजगार भी मजदुर बन गये है । यह चित्र न.रे.गा.  का है जहाँ दोनो काम करते है।

Tuesday, July 14, 2009

मशीन और मानव

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मशीन और मानव मे छीडीं है जगं , और मानव है बेखबर

Monday, July 13, 2009

आँख मिचौली

 

बादलों से हुयी है आँख मिचौली आज सुरज की

 

Sunday, July 12, 2009

मदार



मन्द मदार की मन्द बयार चली आज मन्दाकनी से ।

Saturday, July 11, 2009

Friday, July 10, 2009

आदमी या बन्दर


हममे और उनमे क्या अन्तर है

हम भी माँगते है वो भी माँगते है

हम भी दौड्ते है वो भी दौडते है

हम भी छीनते है वो भी छीनते है

हमसे भी खौफ खाते है उनसे भी खौफ खाते है

हम भी आसमाँ पाना चाहते वो भी पाना चाहते है

बस फर्क इतना

हम आदमी है वो बन्दर है

Thursday, July 9, 2009

ओम साई राम

om sai ram

मेरे कस्बे के साई राम

ओम साई राम

ओम साई राम

ओम साई राम

ओम साई राम

जै साई राम

ओम साई नमो न्मः

जै जै साई नमो न्माहा ।

Wednesday, July 8, 2009

नन्ही परी

  

pari 

आज आयी नन्ही परी

नीली आँखो वाली परी

मनमोहनी परी

आसमाँ से आयी परी

लोगो को भायी परी

प्यारी परी दिल भायी परी

Tuesday, July 7, 2009

फूलों की बहार

बारिश की बुदों ने

फूलो मे बहार लाने का मौसम दिया

तो फूल भी झुम उठे

आज तो मौका था

इतराने का उन्हे भी

तब कलियाँ भी मुस्कराने लगी

और कही चलो आज

मौसम की बहारो मजा ले

Monday, July 6, 2009

रोशनी का जुगाड़

kal kee post

कल रात मै अपने कस्बे मे घुमने निकला तो मेरी नजर अचानक एक नाई के दुकान पर पडी जो बडी़ शिद्द्त से एक व्यक्ति के बाल की कटिंग कर रहा था लेकिन वहाँ सबसे बडी महत्वपुर्ण बात थी रोशनी का जुगाड । वह दो मोमबत्ती जलाये हुआ था । वह एक मोमबत्ती को मुह मे दबाये हुये था तो दुसरी डेस्क पर , हमारे यहाँ बिजली तो आती है लेकिन कब चली जायेगी इसका कोई ठीक नही है, तब तो जाहिर सी बात लोगो को रोशनी का जुगाड किसी न किसी तरह से तो करना पडेगा।

Saturday, July 4, 2009

फुल



आज बहुत दिनो के बाद बरखा आयी
बरखा आयी तो हम भी ईठलाये
पानी के बुदों ने हमे झुमना बताया
पानी के बुदों ने हमे ईतराना बताया
आज मन ने कहा कि
चलो आज हम भी बहक जाये
कि
आज बहुत दिनो के बाद बरखा आयी

Friday, July 3, 2009

छुक छुक रेलगाडी



छुक छुक छुक चलती रेलगाडी रेलगाडी
धुये उडाती चलती रेलगाडी
बच्चो को मनभाती रेलगाडी
बडों को भाती रेलगाडी
छुक छुक छुक चलती रेलगाडी रेलगाडी
सरपट दौडती रेलगाडी
लाल झंडी से रुकती रेलगाडी
हरी झंडी से सरपट दौडती रेलगाडी
लोगो को समय से पहुचाती रेलगाडी
छुक छुक छुक चलती रेलगाडी रेलगाडी