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Friday, June 19, 2009

डुबता सुरज



डुबता सुरज
देख
उडते मन ने कहा
क्यो क्या हुआ
जो सोचा था आज,

कुछ करुगा आज नया
पर मन ने कुछ करने न दिया
इस ठहरे शरीर को

और दिन ढल गया
कुछ भी ना हुआ
फिर जागी, नयी आशा , नये सबेरे के साथ .....